एक कविता माँ के नाम
माँ अक्षर एक हैं।
पर अवतार अनेक हैं ।।
खाना खिलाते वक़्त अन्नपूर्णा बन जाती हो ।
कभी सोते वक्त लोरियों गुनगुनाती हो ।।
माँ की आँचल में सुकून हैं ।
माँ की ममता में अमृत हैं ।।
माँ डाँट थी हैं, कि बच्चें बिगड़ ना जाए।
और प्यार करती हैं, कि बच्चें सुधर जाए ।।
माँ ने मुझे, जन्म दिया।
भारत माँ ने, देश प्रेमी बनाई ।।
माँ ने सिखाया हैं, अ आ इ ई।
देश ने बताया है, rights & duties ।
मातृ दिन के अवसर पर, माँ को प्रणाम ।
मातृभूमि को कोटि कोटि प्रणाम ।।
By
-Sushma V.V.L.-
माँ अक्षर एक हैं।
पर अवतार अनेक हैं ।।
खाना खिलाते वक़्त अन्नपूर्णा बन जाती हो ।
कभी सोते वक्त लोरियों गुनगुनाती हो ।।
माँ की आँचल में सुकून हैं ।
माँ की ममता में अमृत हैं ।।
माँ डाँट थी हैं, कि बच्चें बिगड़ ना जाए।
और प्यार करती हैं, कि बच्चें सुधर जाए ।।
माँ ने मुझे, जन्म दिया।
भारत माँ ने, देश प्रेमी बनाई ।।
माँ ने सिखाया हैं, अ आ इ ई।
देश ने बताया है, rights & duties ।
मातृ दिन के अवसर पर, माँ को प्रणाम ।
मातृभूमि को कोटि कोटि प्रणाम ।।
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-Sushma V.V.L.-
2 comments:
wonderful lines.Keep it up!!
Thank you Radha garu
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